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Smartphone Risk: इस उम्र तक के बच्चों को मोबाइल से रखें दूर, जानिए क्या हैं इसके खतरे

Smartphone Risk: मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ाता जा रहा है। बच्चों के लिए इसे और भी समस्याकारक माना जाता है। पढ़ाई से लेकर गेमिंग और मनोरंजन तक, लगभग हर काम मोबाइल से होने लगा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों की समस्याएं, नींद में कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और व्यवहार संबंधी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इतना ही नहीं, लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों का सामाजिक कौशल भी प्रभावित हो रहा है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने देश के सभी माता-पिता को सलाह दी है कि वे 13 साल से कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दें। उनका तर्क है कि बचपन में इन डिवाइस से होने वाले संभावित नुकसान काफी गंभीर और जीवनभर रहने वाले हो सकते हैं।

मोबाइल बिगाड़ रहा है बच्चों की सेहत | Smartphone Risk

स्वीडन की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि इसका मकसद मुख्य रूप से बच्चों को नुकसानदायक कंटेंट, नींद की समस्याओं से बचाना है। एजेंसी ने माना कि स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों में ध्यान भटकने, सोशल प्रेशर और नुकसानदायक कंटेंट के संपर्क में आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एजेंसी ने स्मार्टफोन के इस्तेमाल और नींद की खराब क्वालिटी के बीच संबंध पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा, यह चिंता सिर्फ स्वीडन तक ही सीमित नहीं है। दुनियाभर के बच्चों में मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती देखी जा रही हैं। कई समस्याएं तो ऐसी हैं जिनका असर पूरे जीवन बना रह सकता है।

बच्चों में मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से क्या दिक्कतें होती हैं? | Smartphone Risk

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा मोबाइल चलाते रहने वाले बच्चों में नींद की कमी बढ़ती देखी जा रही है। कम उम्र में कम नींद मिल पाना कई क्रॉनित बीमारियों को जन्म दे सकता है। बच्चों में नींद की कमी से उनकी याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता, भावनाओं पर काबू रखने की क्षमता और सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। समय के साथ, नींद की खराब आदतों से तनाव और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। इतना ही नहीं अत्यधिक स्क्रीन टाइम को बच्चों में चिंता, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला भी पाया गया है।

इन जोखिमों को भी जानिए | Smartphone Risk

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल कई समस्याओं को जन्म दे सकता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन हो सकता है। ब्लू लाइट आंखों की थकान बढ़ाती है और डिजिटल आई स्ट्रेन का कारण बन सकती है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इससे बच्चों की नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। लगातार रील्स और गेम बच्चों के दिमाग को तत्काल उत्तेजना की आदत डाल सकते हैं। इससे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है। मोबाइल चलाने में अधिक समय बिताने वाले बच्चे अक्सर शारीरिक गतिविधियां कम कर पाते हैं। इससे वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।

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