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Male Infertility: क्या बांझपन के शिकार पुरुष भी बन सकेंगे पिता? जानिए इसके बारे में

Male Infertility: दुनियाभर में लाखों दंपति ऐसे हैं जो संतान सुख पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते हैं. कई मामलों में समस्या पुरुषों में पाई जाती है, जहां शरीर में स्पर्म बेहद कम होते हैं या बिल्कुल नहीं बनते. ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्म में गंभीर पुरुष बांझपन माना जाता है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विकसित एक नई तकनीक ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है.

टेक्नोलॉजी ने किया काम आसान | Male Infertility

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में विकसित की गई इस तकनीक ने उन पुरुषों में भी स्पर्म खोजने में सफलता हासिल की है, जिन्हें पहले यह कह दिया गया था कि वे कभी पिता नहीं बन सकेंगे. यह सिस्टम बेहद उन्नत तकनीक और मशीन आधारित एनालिसिस का इस्तेमाल करती है. इसका उद्देश्य उन छिपे हुए स्पर्म को ढूंढना है, जो सामान्य जांच में दिखाई नहीं देते.

क्या है मामला? | Male Infertility

बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, एक दंपति कई सालों से संतान पाने की कोशिश कर रहा था. जांच में पता चला कि पुरुष एक जेनेटिक समस्या से जूझ रहा था, जिसके कारण उसके सीमन में स्पर्म सेल मौजूद नहीं थे. डॉक्टरों ने उनकी संभावना बेहद कम बताई थी. इसके बावजूद नई तकनीक की मदद से नमूने में कुछ रेयर स्पर्म खोज लिए गए और उसी के जरिए गर्भधारण संभव हो सका.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट? | Male Infertility

एक्सपर्ट के मुताबिक यह तकनीक बेहद तेज गति से हजारों तस्वीरों का एनालिसिस करती है. जहां इंसानी आंखें स्पर्म नहीं खोज पातीं, वहां मशीन आधारित सिस्टम उन्हें पहचान लेती है. इसके बाद एक विशेष रोबोटिक प्रक्रिया उन स्पर्म को अलग करती है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके.  रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इस तकनीक ने अब तक कई ऐसे मामलों में सफलता दिखाई है, जहां पहले उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिन लोगों को पूरी तरह बांझ माना गया था, उनमें से करीब 30 प्रतिशत मामलों में स्पर्म खोजने में सफलता मिली.

अभी रिसर्च की जरूरत | Male Infertility

हालांकि, एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि इस तकनीक पर अभी और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है. लंबे समय तक इसके परिणामों और सुरक्षा को समझना जरूरी होगा. इसके अलावा गोपनीयता और संवेदनशील चिकित्सकीय जानकारी से जुड़े सवाल भी भविष्य में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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