ग्रूमिंग टिप्सडाइट और फिटनेसपरवरिशपोषणवेब स्टोरीजस्पेशलिस्टस्वास्थ्य और बीमारियां
Trending

Alert: बच्चों के लिए ‘स्लो-पॉइजन’ है ये आदत, ये रिपोर्ट हर माता-पिता की बढ़ा देगी टेंशन

Screen Time: लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को इतना नुकसान पहुंचाया है कि जो बीमारियां पहले सिर्फ उम्र बढ़ने पर हुआ करती थीं, वह अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही हैं। कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर, मोटापा, स्ट्रेस और हार्मोनल असंतलन की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, लोग अब शारीरिक मेहनत कम करते हैं, लाइफस्टाइल सेंडेंटरी हो गई है मतलब दिन का अधिकतर समय बैठे-बैठे ये फिर आराम करते हुए बीत रहा है जो असल में कई जानलेवा बीमारियों की मुख्य वजह है।

मोबाइल-कंप्यूटर के बढ़ते इस्तेमाल को इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। मोबाइल-कंप्यूटर जैसे स्क्रीन पर बीतने वाले समय यानी बढ़ते स्क्रीन टाइम को पहले से अध्ययनों में सेहत का दुश्मन और ‘स्लो-पॉइजन’ बताया जाता रहा है। बच्चों का स्क्रीन टाइम और भी ज्यादा देखा जा रहा है जिसकी वजह से कम उम्र में ही क्रॉनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्क्रीन टाइम को लेकर हालिया अध्ययन में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जो हर माता-पिता की टेंशन बढ़ाने वाली हो सकती है।

स्क्रीन टाइम बढ़ने को क्यों माना जाता है खतरनाक? | Screen Time

हाई स्क्रीन टाइम को लेकर अध्ययन की इस रिपोर्ट के बारे में जानने से पहले आइए जान लेते हैं कि बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम क्यों खतरनाक माना जाता है और इससे क्या दिक्कतें हो सकती हैं? अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है। बच्चों में इसका खतरा कहीं ज्यादा है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या भी बढ़ जाती है। इससे आंखों में जलन, धुंधला दिखने, सिरदर्द और ड्राई आई जैसी दिक्कतें हो सकती है। स्क्रीन टाइम बढ़ने का सीधा असर नींद पर भी पड़ता है जिससे अनिद्रा का खतरा बढ़ता है। नींद पूरी न होने से मोटापा, डायबिटीज, तनाव और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और भाषा व सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है।

स्क्रीन टाइम को लेकर चौंकाने वाला खुलासा | Screen Time

हेल्थ एक्सपर्ट्स पहले से ही बढ़ते स्क्रीन टाइम को स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताते रहे हैं। इससे संबंधित हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े भाई-बहनों की तुलना में छोटे भाई-बहन मोबाइल-कंप्यूटर या टीवी जैसे स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण छोटे भाई-बहन अपने बौद्धिक विकास को बेहतर बनाने वाली गतिविधियों के लिए भी कम समय निकाल पाते हैं जिसका असर उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी पड़ सकता है। बड़े भाई-बहनों की तुलना में छोटों का आईक्यू लेवल (मानसिक क्षमता, तर्कशक्ति) की कम हो सकती है।

अध्ययन में क्या पता चला? | Screen Time

इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ ऑस्ट्रेलियन चिल्ड्रन के डेटा का इस्तेमाल किया। इसमें 2-15 साल के लगभग 5,500 ऑस्ट्रेलियाई बच्चों का डेटा था। इसमें 24 घंटे की पूरी दिनचर्या शामिल थी, जिसमें बच्चे के जागने से लेकर सोने तक वो अपना समय कैसे बिताते हैं, इसकी सारी जानकारी थी। शोधकर्ताओं ने एक ही साल में पैदा हुए, एक ही घर-पड़ोस में रहने वाले बच्चों की लाइफस्टाइल की तुलना बाद में पैदा हुए बच्चों से की। इसमें पाया गया कि घर के छोटे बच्चों का स्क्रीन टाइम बड़े बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा था। पहले पैदा हुए बच्चों की तुलना में, बाद के बच्चे हर दिन स्क्रीन टाइम पर 9-14 मिनट ज्यादा बिताते हैं। हालांकि यह मामूली लग सकता है, लेकिन यह स्क्रीन टाइम 7–10% की वृद्धि है। ये एक हफ्ते में लगभग एक से 1.5 घंटे के बीच होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी माता-पिता को किया सावधान | Screen Time

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं कि यह एक्स्ट्रा स्क्रीन टाइम, दूसरी शारीरिक गतिविधियों जैसे बाहर खेल-कूद, दोस्तों से मिलते-जुलने की कीमत पर भी आता है। जब स्कूल, फिजिकल एक्टिविटी या नींद जैसी दूसरी चीजों में कमी आती तो इसका असर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले और बाद के बच्चों के बीच स्क्रीन टाइम का बढ़ते अंतर का एक आम कारण माता-पिता का समय भी है। जैसे-जैसे परिवार बढ़ते हैं, माता-पिता के पास बाद के बच्चों के विकास पर ध्यान देने के लिए कम समय होता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं, स्क्रीन टाइम में जो अंतर हमें मिला है, वे किसी भी दिन के लिए कम लग सकते हैं लेकिन दीर्घकालिक रूप से ये बहुत बड़े नुकसान का कारण हैं। बाद में पैदा हुए बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना उन्हें ऑनलाइन गलत कंटेंट के संपर्क में ला सकता है, जिससे उनके बौद्दिक विकास में भी फर्क देखने को मिल सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button