KGMU: बच्चों में बढ़ते तनाव को दूर करेगी ‘लाइफ स्किल्स एजुकेशन’

KGMU News: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा सोमवार को केजीएमयू परिसर स्थित कलाम सेंटर में “जीवन कौशल शिक्षा (Life Skills Education)” विषय पर एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला एवं सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और स्कूल काउंसिलर्स को मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के व्यावहारिक तरीकों से प्रशिक्षित करना था, ताकि वे बच्चों के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कार्यक्रम का उद्घाटन मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल ने किया। उन्होंने आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मौजूदा समय में बच्चों में तनाव, भावनात्मक समस्याएं और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब समय की मांग है कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल शिक्षा (Life Skills Education) को नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।”
शिक्षकों का प्रशिक्षित होना क्यों है आवश्यक?
कार्यशाला के दौरान केजीएमयू के मनोचिकित्सकों और विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर अपने विचार साझा किए:
समस्याओं की समय पर पहचान: डॉ. अमित आर्य ने जोर देकर कहा कि शिक्षक बच्चों में भावनात्मक एवं व्यावहारिक बदलावों को पकड़ने वाले पहले व्यक्ति होते हैं। इसलिए, अगर शिक्षक मानसिक स्वास्थ्य के प्रति खुद प्रशिक्षित होंगे, तो बच्चों की समस्या गंभीर होने से पहले पकड़ी जा सकेगी।
सकारात्मक निर्णय क्षमता: डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने बच्चों को उम्र के हिसाब से सही यौन शिक्षा देने और उनमें निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making Skills) विकसित करने में लाइफ स्किल्स की भूमिका के बारे में बताया।
सुरक्षित विद्यालयी वातावरण: ‘आईपीएस स्कूल मेंटल हेल्थ सबकमेटी’ की संयोजक डॉ. रश्मि शुक्ला ने विद्यालयी पाठ्यक्रम में जीवन कौशल शिक्षा को प्रैक्टिकल तरीके से शामिल करने और बच्चों के लिए एक सुरक्षित व सहयोगात्मक माहौल तैयार करने के प्रभावी उपाय बताए।
ग्रुप एक्टिविटीज के जरिए सीखे व्यावहारिक तरीके
इस कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें आए शिक्षकों, स्कूल काउंसिलर्स और मनोविज्ञान के पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को केवल थ्योरी नहीं पढ़ाई गई, बल्कि समूह गतिविधियों (Group Activities) और सहभागितापूर्ण शिक्षण विधियों के माध्यम से व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई।
यह आयोजन बच्चों में मानसिक दृढ़ता (Mental Resilience), भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक जीवन कौशल विकसित करने की दिशा में केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग की एक बेहतरीन और निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



