Paratha Side Effects: नाश्ते में पराठा खाना पड़ सकता है महंगा, होते हैं ये पांच बड़े नुकसान


Paratha Side Effects: पराठा भारतीय घरों में नाश्ते का सबसे पसंदीदा ऑप्शन माना जाता है. खासकर आलू पराठा, पनीर पराठा या सादा पराठा कई लोगों की सुबह की पहली पसंद होता है. गरमा-गरम पराठे के साथ दही या मक्खन का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. हालांकि अगर पराठा रोजाना और ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो यह सेहत पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पराठा अपने आप में खराब खाना नहीं है, लेकिन इसे किस तरह बनाया जाता है, किसके साथ खाया जाता है, आपकी लाइफस्टाइल कैसी है यह तय करता है कि इसका शरीर पर क्या असर होगा. एक्सपर्ट्स के अनुसार पराठे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है. लेकिन अगर फिजिकल एक्टिविटी कम हो और रोजाना तेल, घी या मक्खन से बने पराठे खाएं जाए तो एक्स्ट्रा कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है.
वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा
लंबे समय तक ऐसा होने पर वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले पराठे खाने के बाद ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है. खासतौर पर उन लोगों के लिए यह परेशानी बढ़ा सकता है, जिनकी लाइफ स्टाइल काफी हद तक बैठकर काम करने वाली है. एक्सपर्ट का कहना है कि शरीर जब इस ऊर्जा का उपयोग नहीं कर पाता, तो यह धीरे-धीरे इन्सुलिन रेजिस्टेंस और टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है. अगर पराठे को ज्यादा घी मक्खन या तेल के साथ नियमित रूप से खाया जाए तो यह शरीर में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ा सकता है. इससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
एसिडिटी, अपच और पेट फूलने की समस्या
खासतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल या पहले से हार्ट रोग से जूझ रहे लोगों को पराठे का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है. कुछ लोगों को रोजाना पराठा खाने से एसिडिटी, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. भारी और तेल से बने हुए पराठे पचने में ज्यादा समय लेते हैं. अगर इसके साथ पर्याप्त फाइबर और प्रोटीन न लिया जाए तो पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोजाना एक ही तरह का नाश्ता करने से डाइट में भी विविधता कम हो जाती है. अगर हर दिन सिर्फ पराठा खाया जाए तो शरीर को दूसरे जरूरी पोषक तत्व विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते हैं. लंबे समय में यह पोषण असंतुलन का कारण बन सकता है.





