बच्चों के लिए कितनी खतरनाक है Heatwave, कैसे रखें उन्हें सुरक्षित? जानिए सब कुछ


Heatwaves: राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है। बढ़ते तापमान को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। इन दिनों जरा सी भी लापरवाही आपको लू सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार बना सकती है। मौसम विभाग लगातार हीटवेव की चेतावनी जारी कर रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर देखा जाता है। बच्चे बढ़ते तापमान के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। खासतौर पर स्कूल जाने वाले, बाहर खेलने वाले बच्चे और शिशुओं की सेहत को लेकर सभी माता-पिता को अलर्ट किया जा रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण बच्चों में होने वाले खतरों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अलर्ट जारी करते हुए जरूरी सुझाव दिए हैं, जिसे जानना आपके लिए भी बहुत जरूरी है।
बच्चों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह | Heatwaves
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी के दिनों में सभी माता-पिता को सावधान करते हुए बच्चों को धूप में जाने से रोकने और उनकी सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा, बच्चों को धूप में खेलना बहुत पसंद होता है, लेकिन गर्मी उनके इस मजे को खराब न करे इसको लेकर सावधानी जरूरी है। अगर बच्चा धूप में जा रहा है, स्कूल की असेंबली में है या धूप में नंगे पांव खेल रहा है तो ये उसे बीमार कर सकती है। बच्चों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है, ऐसे में उनमें लू लगने के लक्षणों को बिल्कुल अनदेखा न करें और समय रहते डॉक्टर के पास ले जाएं।
☀️Be aware of heat stress symptoms
⛱️Protect from high sun, stay hydrated & stay in shaded/cool areas
⛑️Know first aid measures#BeatTheHeat pic.twitter.com/73OnLGfCsB— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) April 27, 2026
बच्चों में लू का सबसे ज्यादा खतरा | Heatwaves
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के शरीर में पानी की मात्रा तेजी से कम हो सकती है क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वे अक्सर पानी पीने को लेकर सतर्क भी नहीं होते हैं। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, गर्मियों में बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी देना जरूरी है, भले ही वे खुद न मांगें। अत्यधिक पसीना आने से शरीर से सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। ये डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। बच्चों में हीटवेव के कारण होने वाली दिक्कतों के लक्षण समय रहते पहचानें और इसे ठीक करने के उपाय करें। गर्मी के कारण बच्चों में कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
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बेहोशी या मांसपेशियों में ऐंठन
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चिड़चिड़ापन और सिरदर्द
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ज्यादा पसीना आना और कमजोरी
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भ्रमित लगना या सुस्त हो जाना
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तेजी से सांस लेना या दिल की धड़कन तेज होना
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जी मिचलाना और उल्टी होना
हीट स्ट्रोक हो सकती है जानलेवा | Heatwaves
हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 104°F या उससे अधिक हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। बच्चों में अगर गर्मी से संबंधित लक्षण दिखें तो तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं, कपड़े ढीले करें, ठंडे पानी की पट्टी रखें और समय रहते डॉक्टर की सहायता लें। बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न दें। डॉक्टर कहते हैं, हीटस्ट्रोक के लक्षणों पर अगर ध्यान न दिया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए बच्चों को गर्मी से बचाने के साथ-साथ इसके लक्षणों का समय रहते इलाज भी बहुत जरूरी हो जाता है।
बच्चों को गर्मी से कैसे बचाएं? | Heatwaves
विशेषज्ञ कहते हैं, धूप में बच्चों को न जाने दें, समय-समय पर पानी पीते रहने की जरूरत के बारे में सिखाएं। हीटवेव से बचाव के लिए ओआरएस, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ देते रहें। कोल्ड ड्रिंक या ज्यादा शुगर वाले पेय नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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बाहर का तला-भुना, बासी खाना और अधिक मसालेदार भोजनन दें। स्कूल जाने वाले बच्चों के बैग में पानी की बोतल जरूर होनी चाहिए। अगर बच्चे को लू लग गई है या फिर वो बीमार दिख रहा है तो तुरंत जरूरी उपाय करें।
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बच्चे को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं ताकि शरीर का तापमान कंट्रोल हो सके।
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कपड़ों को ढीला कर दें ताकि गर्मी का असर कम हो।
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बच्चे को करवट से लिटा दें ताकि सांस की नली में कुछ फंसे नहीं।
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अगर बच्चा बेहोश है, तो उसे कुछ भी खाने-पीने को न दें।
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बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं ताकि समय रहते इलाज हो सके।




